The brutal gang rape in Delhi दिल्ली का सामूहिक बलात्कार निर्भया काण्ड

 

सम्पूर्ण कहानी

राम सिंह अपने भाई मुकेश सिंह के साथ दिल्ली के रियल एस्टेट पुरम इलाके के पास रविदास कैंप में रहता था। राम सिंह दिनेश यादव के यहा बस ड्राइवर का काम करता था। दिनेश यादव का एक प्राइवेट बस चार्टर बिजनेस था, और राम सिंह उसकी बस का ड्राइवर था।

16 दिसंबर 2012 की रात को राम सिंह अपनी बस को लेकर निकला है । वह और उसका भाई, उसके दोस्त अक्षय ठाकुर, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और एक नाबालिग लड़का मुहम्मद अफरोज हसी-खुशी निकल पड़ते है।

बस मालिक दिनेश यादव को पता नहीं था कि वह बस लेकर पैसेंजर्स को लूटने का प्लान बनाया है। शाम 7:30 बजे, आरके पुरम सेक्टर 4 के पास, उन्होंने रामाधार सिंह नाम के एक बढ़ई को बस में ज़बरदस्ती चढ़ाया, और उसके पैसे, सेल फ़ोन और दूसरा सामान लूट लिया।

रात 8:00 बजे, उन्होंने उसे IT गेट के पास बस से ज़बरदस्ती उतार दिया और वह बस लेकर चले गये। फिर, जब रामाधार सिंह रात 8:15 बजे पुलिस स्टेशन जा रहा था, तो रास्ते में उसकी मुलाकात तीन कांस्टेबल, कैलाश, अशोक और संदीप से हुई, जो उस इलाके में पेट्रोलिंग कर रहे थे।

वह उनके पास गया और बताया कि मेरा पैसा पर्स और सामान सब लूट लिया है।उन तीन कांस्टेबलों ने क्या जवाब दिया? उन्होंने कहा, “हम दूसरे एरिया पुलिस स्टेशन से हैं।” आपको वसंत विहार पुलिस स्टेशन जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराइये उन्होंने रामाधार बढ़ई को भगा दिया।

उन्होंने न तो सेल्स मैसेज से बस के बारे में पूछा और न ही वसंत विहार पुलिस स्टेशन के बारे में जानकारी दी। अगर उन्होंने इस मामले पर कड़ी कार्यवाही किया होता तो निर्भया कांड कभी नहीं होता।

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निर्भया ज्योति सिंह

निर्भया का एक संक्षिप्त परिचय

नाम                                        ज्योति सिंह

सोशल मीडिया नाम                     निर्भया

जन्म                                         1989

माता                                          आशा देवी

पिता                                          बद्रीनाथ सिंह

मूल निवासी                                 उत्तर प्रदेश बलिया

 

सामूहिक बलात्कार                    16 दिसम्बर 2012

 

शिक्षा।                                    दिल्ली का स्थानीय स्कूल

डिग्री                                    बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी

अवनेंद्र प्रताप पांडे                                पुरुष दोस्त S/E

मुहम्मद अफरोज                         17 साल का नाबालिक

जंग लगी लोहे की रॉड से निर्भया के प्राइवेट पार्ट में डालकर
आते बाहर निकाल लिया था

 

Seema samriddhi kushwaha     निर्भया की वकील

 

A.P Singh                               बलात्कारियों के वकील

P . M                                       Dr मनमोहन सिंह

C M                                          शिला दीक्षित

 

मृत्यु                                            29 दिसम्बर 2012

 

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निर्भया के माता पिता

इकलौती बेटी ज्योति सिंह का परिवार, संघर्ष और पैरामेडिकल डिग्री

 

ज्योति सिंह का जन्म 10 मई 1989 को दिल्ली के द्वारिका में हुआ था। उनके माता-पिता, बद्रीनाथ सिंह और आशा देवी, उत्तर प्रदेश में बलिया आश्रम के पास एक छोटे से गांव से थे। उसके दो छोटे भाई थे। ज्योति के पिता, बद्रीनाथ सिंह को अपने परिवार का गुज़ारा करने के लिए दो नौकरियां करनी पड़ीं।

उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनका सपना एक स्कूल टीचर बनना था। लेकिन उनके परिवार के हालात ठीक नहीं थे। इसलिए उन्होंने अपना सपना छोड़ दिया। दिल्ली आने के बाद, उन्होंने एक छोटे से बिजनेस में वॉचमैन और बाद में एक लॉज ड्राइवर के तौर पर काम किया।

उन्होंने अपने परिवार के लिए वह सब कुछ किया जो एक पिता को करना चाहिए,अपनी बेटियों को पढ़ाना। उनका परिवार एक कम इनकम वाला मिडिल क्लास परिवार था। उनके इन्वेस्टमेंट की वजह से दोनों बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो गया था।

ज्योति ने देहरादून के इंस्टिट्यूट ऑफ़ पैरामेडिकल एंड एलाइड साइंसेज कॉलेज से फिजियोथेरेपी में डिग्री ली और दिल्ली के सेंट स्टाफ हॉस्पिटल में इंटर्नशिप के लिए अप्लाई किया, जहाँ वह जवाब का इंतज़ार कर रही थी

परिवार की इकलौती बेटी भी थी। निर्भया के माता-पिता ने बेटे-बेटी में कोई भेदभाव किए बिना निर्भया को अच्छी शिक्षा दी और निर्भया को शिक्षा का अवसर भी दिया। निर्भया बचपन से ही पढ़ाई में बहुत होशियार थी और उसे हमेशा अपने परिवार वालों की उम्मीदों पर भरोसा था,

जिससे आगे की पढ़ाई जारी रखते हुए उसने मेडिकल फील्ड में जाने का पक्का फैसला लिया और फिजियोथेरेपी कोर्स में बहुत अच्छे नंबरों के साथ पास किया। जब यह घटना हुई, तब निर्भय फिजियोथेरेपी में दिल्ली में इंटर्नशिप ली थी ।

 

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निर्भया उर्फ ज्योति सिंह का पुरुष दोस्त अवनेंद्र प्रताप पाण्डेय

ज्योति सिंह और अवनेंद्र प्रताप पांडे movie देखने का plan बनाया

 

16 दिसंबर 2012 को छुट्टी का दिन था। दोपहर के करीब 3: 30 घर से निकली और बोली कि मैं 3 से 4 घंटे में वापस आ जाऊंगी छुट्टी होने के कारण निर्भया ने अपने दोस्त अवनेंद्र प्रताप पांडे से बातचीत कि और एक साथ फिल्म देखने जाने का प्लान बनाया।

अवनेंद्र प्रताप पांडे एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और गोरखपुर, उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। दोनों सिनेमाघरों में आमिर खान की फिल्म तलाश चल रही थी। फिल्म की बहुत चर्चा थी, इसलिए निर्भया और उसके दोस्त ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट से साकेत के PVR सिलेक्ट सिटी वॉक जाने का फैसला किया।

जब वे सिनेमा हॉल पहुँचे, तो वहाँ आमिर खान की मुवी तलास देखने का विचार बनाया लेकिन बहुत ज्यादा भीड़ थी और उन्हें टिकट नहीं मिल पाया इसलिए, तलाश देखने के बजाय, निर्भय और पांडे ने लाइफ़ ऑफ़ पाई नाम की फ़िल्म देखी। शो का समय 6:30 से 8: 30 तक था।

शाम के शो में लाइफ़ ऑफ़ पाई देखने के बाद, निर्भय और पांडे घर जाने के लिए ऑटो का इंतज़ार करने लगे। हालाँकि ज़्यादा देर नहीं हुई थी, लेकिन बहुत ज़्यादा ठंड की वजह से बहुत कम ऑटो वाले आते जाते थे।

थोड़ी देर बाद, उन्हें एक ऑटो मिलता है । जो उन्हें ले जाने के लिए राज़ी हो जाता है, लेकिन वह उन्हें सिर्फ़ मुनिरका बस स्टैंड तक ले जाने के लिए राज़ी होता है।

 

वे दोनों सोचे कि मुनिरका से द्वारका के लिए बस पकड़ लेगे इसलिए वे ऑटो से मुनिरका बस स्टैंड चले जाते हैं। मुनिरका बस स्टैंड पहुँचने के बाद, वे थोड़ी देर बेचैनी से इंतज़ार करते हैं, लेकिन उन्हें अपनी मंज़िल तक पहुँचने के लिए कोई सही सवारी गाड़ी नहीं मिलती है।

 

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निर्भया कि वकील सीमा समृद्धि कुशवाहा

बस के अन्दर बैठे बलात्कारियो को यात्री समझ कर ज्योति सिंह और अवनेंद्र प्रताप पांडे बस के अन्दर चढ़ गये

 

हालाँकि, जब रात के करीब 9:30 बजे होते हैं, तो काले शीशों वाली एक सफ़ेद बस वहाँ से गुज़रती है। बस के गेट से एक लड़का चिल्लाकर उनसे पूछता है कि तुम कहाँ जाओगे जवाब मे निर्भय का दोस्त कहता है, “द्वारका।” बस का कंडक्टर कहता है, कि “हम भी वहीं जा रहे हैं।”

फिर निर्भय अपने दोस्त के साथ बस में चढ़ जाता है। जब निर्भया और उसके दोस्त बस में चढ़ते हैं, तो वे देखते हैं कि अंदर तीन से चार और पैसेंजर पहले से अपनी सीट पर बैठे हैं, उन्हे लगा कि वह सब बस के ही पैसेंजर है। इसलिए उन्हें ज़्यादा यकीन हो जाता है और वे बस में चढ़ जाते है

बस के अंदर एक लड़का उनसे पूछता है कि तुम मुनिरका से द्वारका जा रहे हो । तब निर्भया और पांडे कहते है हा वह किराए के तौर पर हर एक से 10 : 10 रुपया भी लेता है। हालाकि, जब वे टिकट मागते हैं, तो बस कंडक्टर बदतमीज़ी करने लगता था ।और बस कंडक्टर बोलता है कि चुपचाप बैठ जाओ।

बस ड्राइवर द्वारा टिकट देने से मना करना उनके लिए कोई नई बात नहीं थी, इसलिए वे दोनों चुपचाप बस के अंदर बैठकर अपनी मंज़िल का इंतज़ार करने लगते हैं। लेकिन किसे पता था कि उनका इंतज़ार बस इंतज़ार ही रहेगा?

बस कुछ देर तक अपने रास्ते पर चलती रहती है, लेकिन एक पल की हिचकिचाहट के बाद, ड्राइवर बस को तय रास्ते से हटाकर दूसरे रास्ते पर मोड़ देता है। यह महसूस करते हुए, निर्भय का दोस्त तुरंत बस ड्राइवर से पूछताछ करने लगता है।

बस दूसरे रास्ते पर क्यों ले जा रहे हो सवाल का सही जवाब देने के बजाय, बस का दूसरा स्टाफ़ मेंबर निर्भया के दोस्त के साथ बदतमीज़ी करने लगता है और उससे पूछता है, “तुम दोनों इतनी देर रात को क्या कर रहे हो ?” बस ड्राइवरों के अलावा पैसेंजर सीटों पर तीन लोग बैठे हैं। उन्हें लगा कि वे पैसेंजर हैं,

लेकिन थोड़ी देर के बाद, यह साफ़ हो गया कि वे पैसेंजर नहीं,है वे बस स्टॉप के ही दोस्त हैं। अब ये सभी छह लोग मिलकर निर्भय के दोस्त के साथ बदतमीज़ी करने लगते हैं और उसे उकसाने लगते हैं। जब निर्भया का दोस्त जवाब देना शुरू करता है, तो बस के अंदर मौजूद सभी लोग उससे लड़ने लगते हैं और उसे पीटना शुरू कर देते हैं।

 

बारी बारी से बलात्कार किया और फिर महिपालपुर फ्लाई ओवर के नीचे बगैर कपड़ो झाड़ी में फेक दिया

पहले वे निर्भय के दोस्त को लात-घूंसे मारते हैं और फिर इसी लड़ाई के दौरान, एक लड़का बस के अंदर इस्तेमाल होने वाली लोहे की एक बड़ी रॉड निकालकर उसके सिर पर मार देता है। इससे निर्भय का दोस्त वहीं बेहोश हो जाता है। अब निर्भया के साथ छेड़छाड़ का सिलसिला शुरू हो जाता है।

निर्भय के दोस्त को पीटने के बाद, जब वे देखते हैं कि लड़का बेहोश हो गया है, तो वे निर्भया को घसीटकर बस की पिछली सीट पर ले जाते हैं। निर्भय के साथ जो होता है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। बस चलती रहती है, और निर्भय के साथ क्रूरता होती रहती है।

यह ढाई घंटे तक चलता रहता है। इस दौरान, पुलिस की गाड़ियां कई बार बस के पास से गुजरती हैं। बस खुद कई पुलिस स्टेशनों के पास से गुजरती है, लेकिन कोई भी बस को नहीं रोकता है। बस के अंदर लोग बारी-बारी से बलात्कार करते हैं।

निर्भया का दोस्त, जो लोहे की रॉड सिर पर लगने से बेहोश हो गया था, निर्भया की मदद नहीं कर पा रहा था। अकेले छह आदमियों से लड़ना निर्भय के लिए नामुमकिन था। फिर भी, निर्भय अपनी पूरी हिम्मत जुटाकर अपराधियों से लड़ती रही। घटना के अनुसार, वह छह अपराधियों में से तीन पर कई बार हमला करती है।,

और उसे काटकर बचाने की भी कोशिश करती है। दुर्भाग्य से, ऐसा नहीं होता है। खिड़किया और दरवाज़े बंद थे, जिससे अंदर से बाहर के तरफ कोई आवाज़ नहीं आ रही थी।जब वहशी दरिन्दो ने पेट भर जाने के बाद भी उसको नहीं छोड़ा ।

17 साल का नाबालिक मोहम्मद अफरोज ने जंग लगे, एल-आकार स्टील रॉड जिसका उपयोग व्हील जैक हैंडल के रूप में किया जाता हैं, को उसके प्राइवेट पार्ट के अन्दर डालकर उसकी आठ बाहर निकल दिया।इसके बाद निर्भय को बस से बाहर फेंकने और उसे कुचलने की योजना बनाते हैं ताकि यह एक दुर्घटना जैसा लगे।

हालांकि, इससे पहले, वे तय करते हैं कि निर्भया के दोस्त को भी मार दिया जाए। इसलिए, निर्भय के दोस्त के सिर पर दुबारा लोहे की रॉड से वार करते है, और फिर दोनों को महिपालपुर ब्रिज के नीचे बस रोका और रोड के किनारे से कुछ दूरी पर एक झाड़ी के अन्दर फेक देते है। और सबूत कितने के लिए उनके ऊपर से बस चढ़ने की कोशिश करते है लेकिन निर्भया के दोस्त को होश आता है ।

और निर्भया को झाड़ी के और अन्दर खींच लेता है जिससे बस उनके ऊपर नहीं चढ़ पाती है और वो सब बस लेकर भाग जाते है। बस से फेंकने से पहले, वे उनके कपड़े उतार देते हैं और उनका सारा सामान, जिसमें उनके मोबाइल फ़ोन भी शामिल हैं, छीन लेते हैं।

रात के करीब 11 बजे थे। और वह मदद के लिए गुहार लगाने लगता है, लेकिन कई लोग उसे अनदेखा करके गाड़ी नही रोकते हैं। हालांकि, एक अनजान आदमी,वह से लगभग 300 मीटर की दूरी मौजूद टोल टैक्स पर काम करने वाला एक आदमी अपनी गाड़ी को रोका दोनों की बुरी हालत में देखकर सबसे पहले दूकान से कपड़े का कवर लेकर आए और फाड़कर आधा आधा दोनों को दिया शारीर ढकने के लिए क्योकि उन हैवानो उनके सारे कपड़े शरीर से निकालकर फेक दिया था।

पुलिस को फ़ोन करता है। थोड़ी देर में पुलिस की एक टीम आती है, और दोनों को तुरंत सफ़दरजंग हॉस्पिटल में भर्ती कराया जाता है। और उसके शरीर से खून बह रहा था, उसका पूरा शरीर चकनाचूर हो गया था और बहसी दरिन्दो ने उसके प्राइवेट पार्ट में जंग लगी लोहे रॉड डाली थी।

निर्भया की हालत देखकर तुरंत इलाज शुरू किया गया। हालत इतनी खराब हो गई थी कि उसे तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट की ज़रूरत पड़ी। कुछ ही घंटों के बाद निर्भया के साथ हुई हैवानियत की खबर देश और दुनिया भर की मीडिया में फैलने लगी. लोगों ने जब निर्भय के साथ हुई हैवानियत की कहानी सुनी तो वे गुस्से से भर गए।

लोग प्रशासन और सरकार के खिलाफ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने लगे. साथ ही लोग जल्द से जल्द अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग करने लगे. जल्द ही इस विरोध ने आंदोलन का विकराल रूप ले लिया और पूरे देश में निर्भया के समर्थन में प्रदर्शन होने लगे।

देश भर में लोग निर्भय के लिए प्रार्थना भी करने लगे, लेकिन अस्पताल में निर्भया की हालत दिन पर दिन बिगड़ती चली गई, आखिर 16 दिसंबर 2012 से 19 दिसंबर 2012 के बीच निर्भय की एक के बाद एक पांच सर्जरी हुई. तमाम कोशिशों के बावजूद निर्भय की हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

इस कारण 21 दिसंबर को भारत सरकार ने देश के टॉप डॉक्टरों की एक कमेटी बनाई और निर्भय को सरकारी खर्चे पर अच्छी से अच्छी मेडिकल ट्रीटमेंट देने का निर्देश दिया गया इसके बावजूद निर्भया की हालत समझ में नहीं आई इसके बजाय, उसके शरीर का तापमान 102 से 103 डिग्री फारेनहाइट तक बढ़ गया।

यहां तक ​​कि संक्रमण बुरी तरह फैल गया। सड़कों पर लोग निर्भया के लिए आवाज उठा रहे थे, डॉक्टर उसे बचाने की पूरी कोशिश कर रहे थे, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी।

निर्भया ने सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में दम तोड़ दिया 

इसके बाद 26 दिसंबर को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि निर्भय को दुनिया के सबसे अच्छे अंग प्रत्यारोपण अस्पताल में भेजा जाएगा। इसके बाद निर्भय को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में ले जाने की तैयारी शुरू हो गई।

आखिरकार, 27 दिसंबर को निर्भया सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल पहुंचती है, जहां उसका इलाज शुरू होता है। हालांकि, सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल पहुंचने पर उसकी हालत ज्यादा बिगड़ जाती है। 29 दिसंबर को स्थानीय समयानुसार सुबह 4:45 बजे निर्भय की मौत हो जाती है। निर्भया की मौत के बाद उसके शव को वापस दिल्ली लाया जाता है, जहां कड़ी सुरक्षा के बीच उसका अंतिम संस्कार किया जाता है।

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