Laila majanu incredible love story लैला-मजनू के मोहब्बत की वह अमर दास्तान जो सदियो से दिलों पर राज करती है

संपूर्ण प्रेमकथा

फ़ारसी कवि निज़ामी गंजवी 1141–1209 ई . मे लैला और मजनू की कहानी को कविता का रूप देकर दुनिया के साहित्य में अमर कर दिया । यह कहानी 7वीं सदी के अरब इलाके में हुई थी और ऐतिहासिक रूप से कवि क़ैस इब्न अल-मुलव्वा की ज़िंदगी से जुड़ी है, जिन्हें उनके दीवाने प्यार की वजह से “मजनू” कहा जाता था। सच्चा प्यार शरीर का नहीं, बल्कि आत्मा का बंधन होता है। लैला मजनू का प्यार समाज की दीवारों, समय की सीमाओं और यहाँ तक कि मौत के बंधनों से भी आगे निकल गया था।

मजनू (क़ैस इब्न अल-मुलव्वा) का जीवन परिचय

  • पूरा नाम: क़ैस इब्न अल-मुलव्वा
    जन्म: लगभग 645 ई .
    जन्मस्थान: नज्द क्षेत्र, अरब
    पिता का नाम: अल-मुलव्वा
    मृत्यु: लगभग 688 ई 43 years लगभग

लैला (बिन्त अमीर) की जीवन परिचय

  • पूरा नाम: लैला बिन्त अमीर
    जन्म: लगभग 650 ई
    जन्मस्थान: अरब का एक अमीर कबीला
    पिता का नाम: आमिर
    मृत्यु: लगभग 688 ई

स्कूल (मदरसा) से शुरू हुई लैला और मजनू कि अमर प्रेम कहानी

लैला और मजनू दो कबीलो के प्रेमियो की कहानी है। एक कबीले में कैस नाम का लड़का पला-बढ़ा, और दूसरे कबीले में लैला “बिन्त” नाम की लड़की पैदा हुई। इत्तेफ़ाक से, वे दोनों एक ही मदरसे में पढ़ते थे। लैला और कैस के बचपन को मदरसा, (स्कूल ) ने एक साथ ले आया, और शायद अल्लाह की मर्ज़ी से ऐसा हुआ कि कैस लैला को पसंद करता था और उसे प्यार की नजरो से देखा करता था।

वे अलग-अलग बहानों से एक-दूसरे के करीब आते रहे, एक-दूसरे को सबक सिखाते रहे। जब लैला कैस को बताने की कोशिश करती कि ये बातें नहीं हैं तो कैस ऊर्फ मजनू उसकी बातों पर ध्यान देने के बजाय, कैश उसके चेहरे को देखता रहता था लैला गुस्से से टोकती, “तुम मुझे क्यों देख रहे हो?” कैश ऊर्फ मजनू उसे मासूम नज़रों से घूरता था लैला फिर उसे समझाने की कोशिश करती, “अपना पाठ याद रखो वरना पिटायोगे यह रोज़ का काम था।

 

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लैला का गांव काफिल जवा जहां पैदा हुई थी सऊद अरब फोटो: सोशल मीडिया

वह समझाती रहती, और कैश लैला का चेहरा देखता रहता था उसे बचपन से ही लैला पसंद आने लगी थी। उसे समझ नहीं आता था कि उसे देखे बिना वह बेचैन क्यों हो जाता था जब भी वह मदरसे से घर लौटता, तो उसे अपने चारों ओर लैला और उसकी आवाज़ सुनाई देती। वह खाने-पीने के बारे में सोचता भी नहीं था। उसके घरवाले उसे डांटते और ज़बरदस्ती खाना खिलाते थे मदरसे से घर लौटने के बाद उसने कभी अपना पाठ याद नहीं किया था।

उसके घरवाले उसे डांटते, “अपना पाठ याद कर लो नहीं तो मौलवी साहब तुम्हें डांटेंगे।” पूरे स्लेट (दफ्ती ) पर सिर्फ़ एक ही शब्द लिखता: था “लैला”। उसके घरवाले सोचते थे कि वह बहुत मेहनती बच्चा है। वह मौलवी साहब का सिखाया हुआ पाठ याद कर रहा है। फिर एक दिन, जब मौलवी साहब ने कैस की स्लेट देखा, तो वह हैरान और परेशान हो गए। मौलवी साहब ने कैस की तरफ़ देखा।

तो कैस, बच्चा होने के कारण, मौलवी साहब की नज़रों ने हैरानी और तेज़ी को पहचान नहीं पाया। फिर मौलवी साहब ने पूछा, “तुमने स्लेट पर क्या पाठ लिखा है?” कैस ने जवाब दिया, “लैला।” मौलवी साहब परेशान हो गए और पूछा, “मैंने जो पाठ तुम्हें पढ़ाया था, वह तुमने क्यों नहीं लिखा?” कैस ने जवाब दिया, “मैंने वही पाठ लिखा है ।” मौलवी साहब को गुस्सा आया और यह सोचकर कि यह बच्चा उनके साथ मज़ाक कर रहा है,।

उन्होंने अपनी छड़ी पकड़ ली ।और गुस्सा होकर बोले, “अपने दोनों हाथ फैलाओ। मैं तुम्हें अभी पाठ सिखाता हूँ।” फिर कैस ने अपनी हथेलियाँ खोली और उनके आगे बढ़ाया। मौलवी साहब ने कैस की हथेली पर अपनी छड़ी से ज़ोर से मारा। फिर उन्होंने दूसरी हथेली पर भी उतनी ही ज़ोर से मारा और गुस्से से कहा, “उम्मीद है तुम्हें अब पाठ याद हो जाएगा। जब तुम कल घर आओ, तो पूरा पाठ लिखकर लेकर आना जाओ और अपनी सीट पर बैठ जाओ।” बाकी विद्यार्थी यह सब कुछ होते हुए देख रहे थे।

उन्हें लगा कि कैस अपना काम घर से करके नहीं लाया है, और मौलवी साहब ने उसे पीटा है। लेकिन लैला को अपने दोनों हाथों की हथेलियों में जलन महसूस हो रही थी। उसने अपनी हथेलियों को देखा और महसूस किया कि कैस की हथेलियों पर लगी छड़ी के निशान खुद-ब-खुद बन गए थे। यह देखकर लैला खुद हैरान रह गई। वह एक मासूम बच्ची थी, समझ नहीं पा रही थी कि क्या हुआ है। हालाँकि, कैस की छड़ी की मार से वह दुखी थी।

 

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यह वही पहाड़ जहां लैला और मजनू मिला करते थे फोटो: सोशल मीडिया

जब मदरसे में उनका काम खत्म हो गया, तो लैला ने रास्ते में कैस से पूछा, “कैस, क्या तुम अपना काम करके घर से नहीं लाए?” कैस ने जवाब दिया, “लैला, मैने लाया था। मैंने पूरी स्लेट (दफ्ती) पर लिखा था।” लैला ने पूछा, “अगर तुमने लिखा होता, तो मौलवी साहब ने तुम्हें क्यों पीटा?” कैस ने जवाब दिया, “मुझे क्या पता ? यह तो मौलवी साहब को ही पता होगा।” लैला ने हैरानी से कहा, “ठीक है, कल जब तुम काम करके घर से आओ, तो सबसे पहले मुझे स्लेट (दफ्ती) दिखाना।” कैस ने सिर हिलाया।

जब कैस अगले दिन मदरसे मे पहुँचा, तो लैला ने कहा, “मुझे अपना स्लेट (दफ्ती) दिखाओ।” कैस ने अपना स्लेट (दफ्ती) लैला के सामने रख दिया। लैला ने परेशान होकर क़ैस को देखा और पूछा, “क्या तुम कल भी ऐसा ही स्लेट (दफ्ती) पर लिखकर लाये थे?” क़ैस ने सिर हिलाकर बोला हा मैने कल भी ऐसा ही लिखकर लाया था लैला ने परेशान होकर कहा, “अगर तुम ऐसे ही लिखते रहे तो मौलवी साहब तुम्हें रोज़ पीटेंगे।” क़ैस ने पूछा, “क्या मैं स्लेट (दफ्ती) पर गलत लिख दिया हूँ?” लैला ने जवाब दिया, “तुम तो बस मेरा नाम स्लेट दफ्ती पर लिखे हो।”

तब क़ैस ने कहा, “और क्या लिखूँ? जब मैं घर जाता हूँ, तो तुम्हें हर जगह देखता हूँ। तुम्हारी आवाज़ सुनता हूँ, और तुम्हें देखता रहता हूँ।” क़ैस का जवाब सुनकर लैला परेशान हो गई, क्योंकि वह एक मासूम और भोली भाली बच्ची थी। उसे क़ैस की दिमागी हालत का कोई अंदाज़ा नहीं था। लैला ने उसे समझाने की कोशिश करते हुए कहा, “बस आज से मौलवी साहब जो भी सिखाएँ, उसे याद करके लिखा करो।” बात वहीं खत्म हो जाती है । लैला अपने रास्ते चली गई और क़ैस अपने रास्ते। अगले दिन जब मौलवी साहब ने क़ैस को बुलाकर उसकी स्लेट देखी, तो उस पर फिर से लैला का नाम लिखा हुआ था।

 

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दूसरा स्थान: यह पहाड़ गुफा जहां लैला और मजनू मिला करते थे फोटो: सोशल मीडिया

मौलवी साहब को बहुत गुस्सा आया। उस समय उसने कैस की हथेलियों पर पाच डंडे मारे और गुस्से से कहा, “मुझे उम्मीद है कि तुम कल सही लिखावट वाली स्लेट लाओगे।” जब कैस अपनी सीट पर पहुँचा, तो उसने लैला की तरफ देखा। लेकिन लैला वहाँ नहीं थी। फिर कैस ने अपने बगल में बैठे अपने साथी से पूछा, “लैला कहाँ है?” उसके साथी ने कहा कैस, “जब तुम्हें मौलवी साहब पीट रहे थे, तो लैला उठकर चली गई थी।”यह सुनकर कैस खड़ा हो गया। कैस के साथी ने पूछा, “कैस, तुम कहाँ जा रहे हो?” कैस ने जवाब दिया, “अगर लैला यहाँ नहीं है, तो मैं यहाँ क्या कर रहा हूँ?” यह कहकर कैस मदरसे से चला गया। इस बीच, जब लैला घर पहुँची, तो उसके हाथों पर चोट के निशान और डंडों के निशान थे।

जब लैला के पिता को पता चला कि मौलवी साहब ने उनकी बेटी को पीटा है, तो उसके पिता को बहुत गुस्सा आया क्योकि वह अपने कबीले के लीडर थे, फ़िर एक मामूली सा मौलवी उनकी बेटी लैला को इतनी बड़ी सजा कैसे दे सकता था? इसलिए, वह सीधे मदरसे गए और मौलवी साहब से कहा, “आपने मेरी बेटी को इतनी बेरहमी से पीटा है। उसके हाथों पर चोट के निशान हैं।” मौलवी साहब परेशान होकर बोले, “अल्लाह गवाह है, मैंने लैला को कभी भी तिनके से नहीं छुआ है डंडे से मरने की बात तो दूर है लैला के पिता, जो एक लीडर थे,मौलवी साहब के तरफ घूरकर कहा, ” तो क्या हम झूठ बोल रहे हैं? हमारे साथ आओ। हम तुम्हें दिखाते हैं।”

फिर, मौलवी साहब परेशान होकर लैला के पिता के साथ चले गए। जब ​​वे वहाँ पहुँचे और लैला की हथेलियों के निशान देखे, तो वे हैरान रह गए। उन्होंने लैला से पूछा, “सच बताओ, तुम्हें किसने मारा?” लैला ने जवाब दिया, “मुझे किसी ने नहीं मारा।” मौलवी ने पूछा, “तो ये निशान कैसे आए हैं?” लैला ने जवाब दिया, “मुझे नहीं पता।” यह कहकर लैला चली गई। मौलवी ने लैला के पिता से कहा, “मैं फिर कहता हूँ,अल्लाह मेरे गवाह हैं। मैंने लैला को नहीं मारा, लैला के पिता परेशान हो गए। फिर उन्होंने मौलवी को आदर से जाने दिया।

इस बीच, मौलवी हैरान और परेशान होकर लौट रहा था, आसमान की ओर कुछ भुनभुना रहा था, “हे भगवान, यह क्या है? मैंने क़ैस को मारा, और लैला की हथेलियों पर निशान आ गए।” अगले दिन, मौलवी ने प्यार से क़ैस को बुलाया और उससे वह तख्ती दिखाने को कहा। तो कैस ने वह तख्ती स्लेट दिखाया लेकिन मौलवी फिर हैरान रह गया क्योंकि तख्ती स्लेट की पूरी लाइन पर सिर्फ़ “लैला, लैला” लिखा था। फिर मौलवी ने कैश को अजीब तरह से देखा और कहा, “बेटा, अपना काम करो। हम अपना काम करेंगे।”

जब कैश चला गया, तो मौलवी भुनभुनाया और कहा “हे अल्लाह, तुम दिलों का हाल सबसे अच्छे से जानते हो। तुम्हारे मामलों में कौन दखल दे सकता है? तुम्हारे राज़ कौन जानता है?” समय बीतता गया। यह लैला और क़ैस का बचपन था। लैला और क़ैस की कहानी दोनों कबीलों में खुशबू की तरह फैल गई। और फिर एक समय आया। लैला के पिता लैला को मदरसे से ले गए। जब ​​क़ैस को पता चला कि लैला मदरसे नहीं आई है, तो वह भी मदसा छोड़कर चला गया। कैश की हालत और भी खराब होती जा रही थी, और उसके परिवार को समझ नहीं आ रहा था कि उसे क्या हो गया है।

जब कैश के पिता ने उससे पूछा, “बेटा, तुम्हें क्या बीमारी है? तुम मुझे बताते क्यों नहीं?” क़ैस ने उदास होकर अपने पिता को जवाब दिया, “मुझे कोई बीमारी नहीं है, बाबा।” उसके पिता ने उसे प्यार किया और कहा, “क़ैस, अगर तुम्हें कोई बीमारी नहीं है, तो तुम इतने चुप, उदास और परेशान क्यों रहते हो, बेटा?” यह सुनकर क़ैस सिर झुकाकर घर से बाहर चला जाता है। असल में, उसे यह भी नहीं पता था कि लैला किस कबीले से है या वह कहाँ से आई है। वह उससे मिलने के लिए बेताब था। एक दिन क़ैस मदरसे के बाहर जाकर खड़ा हो गया। जब स्कूल खत्म हुआ, तो सभी चेहरे नए थे। लैला के साथ बैठे उसके दोस्त भी कहीं नहीं दिख रहे थे। क़ैस को पता ही नहीं चला कि कितना समय बीत गया। यह सराय का इलाका था।

रेगिस्तान में जहाँ तक नज़र जाती थी, यहाँ-वहाँ इंसानों के कैंप थे। एक दिन क़ैस लैला को ढूंढते हुए एक आबादी वाले इलाके में गया। उसे भूख और प्यास का बिल्कुल भी एहसास नहीं था। वह भूखा-प्यासा बैठा रहा, और पास से गुज़रते हुए एक बूढ़े आदमी ने, उसका नाम अंदाज़ा लगाकर उससे पूछा,बेटा तुम्हारा नाम क्या है?उसने जवाब दिया, “मुझे नहीं पता।” बूढ़े आदमी ने हैरान होकर पूछा, “तुम कहाँ से हो?” कैस ने जवाब दिया मुझे नहीं पता बूढ़ा आदमी उसके सामने बैठ गया और बड़ी दया से पूछा, “बेटा, तुम इस शहर में किसलिए आए हो? क्या तुम किसी से मिलना चाहते हो?” कैस ने जबाव दिया हा मैं लैला से मिलना चाहता हू। बूढ़े आदमी ने उसे देखा और कहा, “यह लैला कौन है?” कैस ने बूढ़े आदमी को देखा और कहा, “आँखें होते हुए भी तुम अंधे हो गए हो।”

फिर बूढ़ा आदमी जाग गया। वह समझ गया कि मै एक पागल आदमी के चक्कर में पड़ गया हू। तब बूढ़े आदमी ने धीरे से कैस के सिर पर हाथ फेरा और कहा, “बेटा, अगर तुम्हें भूख लगी है, तो मैं तुम्हारे लिए कुछ खाना लाता हूँ।” कैस ने जवाब दिया, “लैला,” बूढ़े आदमी ने कहा, खुद को इस डर से आज़ाद करने की कोशिश करते हुए सोचा कि मै किस तरह के बदतमीज़ आदमी के चक्कर में पड़ गया हू। एक बड़े घर की तरफ इशारा करते हुए उसने कहा, “लैला वहाँ है।” ऐसे में कैस ने हैरानी से बूढ़े आदमी के बढ़े हुए हाथ को देखा, फिर खुद खड़ा हुआ और उस घर की तरफ चलने लगा जिसका उसने इशारा किया था। जैसे ही वह पास पहुँचा, उसे एक सुंदर घर दिखा। खिड़कियाँ रोशन थीं, रास्ते थे, पर्दे हवा में लहरा रहे थे।

क़ैस वहाँ बैठा एक खिड़की को घूर रहा था। अचानक, उसकी नज़र एक लड़की पर पड़ी। वह लड़की लैला थी, वही लड़की जो उसके दिल और दिमाग में रहती थी। क़ैस के मुँह से अनायास ही “लैला” शब्द निकल गया। पूरा माहौल गूज उठा, लैला के कानों तक पहुँचा। चौंककर, लैला ने आवाज़ की तरफ देखा और देखा कि क़ैस वहाँ बैठा उसे घूर रहा है। लैला का मन किया कि क़ैस की तरफ जाए मिलने के लिए लेकिन अपने पिता के डर से उसके कदम रुक गए, और लैला ने बेबसी से हाथ हिलाया, जैसे कह रही हो, “हाँ, मैं तुम्हारी लैला हूँ।”

कैस का दिल ज़ोर से धड़क उठा। उसकी बेचैन आँखें शांत हो गईं, जैसे उसके बेचैन दिल की प्यास बुझ गई हो। कैस खड़ा हुआ, लैला को देखा, और दो कदम आगे बढ़ा। लैला ने हाथ हिलाकर उसे आगे बढ़ने से मना किया, और कैस के बढ़ते कदम रुक गए। हाथ हिलाकर उसने उसे बैठने का इशारा किया, और कैस बैठ गया, और लैला ने खिड़की का पर्दा खीच दिया। शाम होते ही, लैला ने कैस के लिए खाना भेजवाया । कैस ने खाना खाने से पहले खाना लाने वाले को देखा।

वह लैला नहीं थी; वह एक बूढ़ी औरत थी। बूढ़ी औरत मुस्कुराई और बोली, “खाओ बेटा, यह खाना लैला ने भेजवाया है। मैं थोड़ी देर बाद वापस आकर बर्तन ले जाऊँगी।” बूढ़ी औरत वापस आई, और एक भूखे-प्यासे आदमी को खाने के लिए कुछ खाना मिला। फिर कैस ने वहीं डेरा डाल लिया। आने-जाने वालों को लगा कि वह कोई फकीर है। और यह कुछ दिनों तक चलता रहा। कैस हर समय खिड़की की तरफ देखता रहता था, और कभी-कभी उसे लैला वहाँ दिख जाती थी, और यह कैस के लिए बहुत बड़ी बात थी। फिर एक रात, लैला खुद कैस के पास आई।

कैस उसका चेहरा देख रहा था, और लैला ने कहा, “कैस, तुमने अपने हालात इतना क्या बिगाड़ लिया है? मुझे तुम्हें देखकर दुख हो रहा है। अपने कबीले में वापस जाओ।” कैस ने जवाब दिया, “लैला मै कबीले में वापस नहीं जाऊगा जहाँ भी मेरी लैला होगी, वहाँ कैस होगा।” परेशान होकर लैला ने कहा, “मुझे समझने की कोशिश करो। तुम जहाँ भी हो, लैला तुम्हारे दिमाग में होगी। अगर किसी को शक हुआ, और खासकर अगर मेरे परिवार को पता चला, तो बहुत बुरा होगा।

तुम यहाँ बैठे हो, और मैं पूरी रात परेशान रहती हूँ। मुझे नींद नहीं आती है।” कैस ने पूछा, “यह नींद क्या है, लैला? जब मैं आँखें बंद करता हूँ, तब भी तुम मेरे सामने होती हो।” लैला ने पूछा, “तुम मुझे समझने की कोशिश क्यों नहीं कर रहे हो? मेरे पिता तुम्हारी वजह से वह जगह छोड़कर चले आए, और अब वह कबीले के साथ यहाँ आकर रह रहे हैं।” और सच तो यह है कि मैं तुम्हारे पागलपन और जुनून से परेशान हूँ। अगर तुम्हें कुछ हो गया, तो मैं टूट जाऊँगी। “मैं ज़िंदा हूँ क्योंकि तुम मेरे सामने हो,” कैस ने जवाब दिया। “लैला, तुम्हें देखे बिना मेरी आत्मा को शांति नहीं मिलती।” लैला ने कैस का हाथ पकड़ा और कहा, “कैस, मैं यह समझती हूँ, लेकिन मेरा परिवार नहीं। वे तुम्हें मार डालेंगे। तुम यह जगह छोड़ दो और एक मील की दूरी पर जंगल है। तुम वहाँ जाओ। मैं वहाँ तुमसे मिलने आऊँगी।” कैस ने लैला का चेहरा देखा और सिर हिलाया, जैसे वह समझ गया हो।

लैला रात के अंधेरे में उसी रास्ते से लौट गई जिस रास्ते से वह आई थी। और कैस उस रास्ते पर चल पड़ा जिस पर लैला ने उसे बताया था। और इस तरह समय बीतता गया। कभी लैला खुद आती, कभी किसी के ज़रिए खाना भेजवाती। फिर एक रात, कुछ आदमी आए और कैस को बुरी तरह से पीट दिया। हमलावरों में से एक ने कहा, “अगर तुम बच गए, तो यहाँ से चले जाओ। अगर तुमने मुझे फिर दिखा तो मैं तुम्हें मार डालूँगा।” और फिर वे चले गए। शायद लैला के परिवार को पता चल गया था, और कैस सिर्फ़ सोच सकता था कि अगर वह यहा से चला गया और लैला वापस आई, तो मुझे यहा पर नहीं देखकर वह बहुत दुखी होगी। वह वहाँ ज़ख्मों से लथपथ पड़ा था। अगर कोई दिन के उजाले में वहाँ से गुज़रता, तो वह कैस की हालत देखकर उसे भिखारी समझ लेता और उसे कुछ खाने-पीने के लिए देता। और फिर समय बीतता गया।

साल बीतते गए। न तो लैला वापस आई, न ही उसे उससे कोई मैसेज हि मिला। लैला को लगा कि उसके पिता के भेजे हुए आदमियों ने कैस को पीटा और भगा दिया है। और फिर एक दिन, वही बूढ़ा आदमी जिसने कैस को लैला के घर का पता दिया था, जंगल से गुज़र रहा था। उसने बागोर में कैस को देखा और उसे पहचान लिया। वह कैस की हालत देखकर चौक गया और बोला, “दोस्त, क्या तुम वही हो जो मुझे लैला कहकर बुलाते थे?” कैस ने बूढ़े आदमी की तरफ देखा और कहा, “हाँ, मै वही हूँ।” बूढ़े आदमी ने पूछा, “तुम्हारी लैला कहाँ है?” कैस ने अपना हाथ उसकी छाती पर रखा और कहा, “वह मेरे दिल में है।” बूढ़े आदमी ने हैरानी से कहा, “तुम तो सच्चे आशिक लगते हो। लैला के प्यार में तुम मजनू बन गए हो।” कैस ने पूछा, “यह मजनू क्या है?” बूढ़े आदमी को उस पर दया आई और उसने कहा, “जो प्यार में पागलपन की हद तक पहुँच जाता है, उसे पागल और मजनू दोनों कहते हैं।”

फिर कैस ने बूढ़े आदमी की तरफ देखा और कहा, “तुम मुझे कुछ भी कह सकते हो,। यह तुम्हारा हक है, और मैं अपना हक पूरा कर रहा हूँ।” बूढ़े आदमी ने खुश होकर कहा, “वाह, क्या बात कही। तुमने मेरा हक पूरा कर दिया। लेकिन बेटा, जिस लैला से तुम प्यार करते हो, और भूख-प्यास से मर रहे हो, वह रोज़ भीख बाँटती है। जाओ और उससे अपने हिस्से का खाना ले आओ।” यह सुनकर कैस ने बूढ़े आदमी की तरफ देखा और कहा, “क्या खाना है? मेरा मालिक मुझे देता है। मुझे जो चाहिए वो मिल जाता है।” बूढ़े आदमी ने कैस को प्यार भरी नज़रों से देखा और कहा, “तुम्हारी लैला की सगाई एक बिज़नेसमैन से हो गई है ।

और जल्द ही उसकी शादी हो जाएगी। फिर वह यहाँ से चली जाएगी। क्या तुम उससे मिलने नहीं जाओगे? क़ैस ने आसमान की तरफ़ देखा और कहा, “मेरा मालिक हर जगह है, और मेरी लैला हर जगह है। मैं जहाँ भी देखता हूँ, मुझे मेरा मालिक और मेरी लैला भी दिखाई देती हैं।” क़ैस की बातों से इमोशनल होकर, बूढ़े आदमी ने अपने दोनों हाथों से उसका सिर पकड़कर, उसका चेहरा चूमा, और फिर उठते हुए कहा, “बेटा, मालिक के राज़ सिर्फ़ मालिक ही जानता है।”

बूढ़ा आदमी चला गया। थोड़ी देर बाद, क़ैस खड़ा हुआ। उसके फटे-पुराने कपड़े, बढ़ी हुई दाढ़ी, और लंबे बालों ने उसकी शक्ल बिगाड़ दी थी। अपने थके-हारे और कमज़ोर शरीर के साथ, वह धीरे-धीरे जंगल से बाहर निकला, बस्ती की तरफ़ बढ़ा, और फिर लैला के घर के सामने अपनी जगह पर बैठ गया। बाद में, जैसे-जैसे दिन ढलने लगा, भिखारी अपने भिखारियों के साथ इकट्ठा होने लगे। और फिर एक ऐसा पल आया जब इकट्ठा हुए फ़कीर हिले। बर्तनों के खनकने की आवाज़, और यह सब बस यूँ ही था। लैला, भीख बाँटने वाली, आ गई थी।

दो आदमी एक बड़ा बर्तन लेकर लैला के साथ चल रहे थे। लैला बर्तन से चावल निकाल रही थी और सभी फकीरों के बर्तनों में डाल रही थी। लैला ने देखा कि एक फकीर सिर झुकाए, भीख लेने के लिए हथेलियाँ फैलाए बैठा है। लैला उसके पास खड़ी हो गई, उसे कुछ चावल दिए, और धीरे से पूछा, “क्या तुम कैस हो?” लैला की आवाज़ सुनकर, कैस ने सिर उठाया, उसकी तरफ देखा, और कहा, “हाँ, मैं कैस था

अब लोग मुझे पागल, दीवाना और मजनू कहते हैं।” लैला सीधी हुई, बोली, “मैं रात को आऊँगी,” और चावल उसकी हथेलियों में डाल दिए। भीख बाँटने के बाद, वह वापस चली गई। और सब भिखारी भी चले गए, और एक पागल, कैस, अपने हाथों में चावल लेकर चावल को घूर रहा था। दिन खत्म हो गया था। शाम हो गई थी। कैश अकेला बैठा अपनी लैला का इंतज़ार कर रहा था। शाम रात में बदल गई। रात बीतती गई, और देर रात लैला, एक चोर की तरह, बिना किसी के कदमों की आह से उससे मिलने आई। चौदहवि का चाँद आसमान में अपनी किरणें बिखेर रहा था। जब लैला घुटनों के बल उसके सामने बैठी, तो वह चौंक गया और उसकी तरफ देखने लगा।

लैला ने प्यार से कहा, “कैस, मैं तुम्हें यहाँ से चले जाने के लिए कहने आई हूँ। मेरे पिता एक बेरहम आदमी हैं, और देखो तुमने अपनी क्या हालत बना ली है।” कैश ने जवाब दिया, “लैला, मेरे दिल, दिमाग और वजूद में सिर्फ़ तुम ही रहती हो। कैस, मैं ये बातें समझतती हूँ। मेरा परिवार नहीं समझता। फिर कैस ने जवाब दिया, “लैला, तुम समझती हो कि मुझे दुनिया या तुम्हारे परिवार से क्या लेना-देना है।

” अचानक, रात के सन्नाटे में एक दस्तक सुनकर, लैला जाग गई और इधर-उधर देखते हुए बोली, “शायद कोई हमें देख रहा है। मैं चलती हूँ।” फिर लैला अचानक उठी और वापस मुड़ी। कैश उसे प्यार भरी नजरो से देखता रहा। और आखिर मे , लैला कैस की नज़रों से ओझल हो गई, और फिर धीरे-धीरे, सुबह की गर्मी कम हो गई। दिन निकलने लगा था। जैसे ही दिन निकला और सूरज ने अपनी धूप पूरी धरती पर फैला दी,।

और लोग अपने काम पर जाने लगे, लैला के घर का एक नौकर कैस के पास से गुज़रते हुए रुका और पूछा, “तुम कौन हो? और तुम यहाँ क्यों बैठे हो?” कैस ने उसे देखा और कहा, “लैला!” नौकर को गुस्सा आ गया। “तुम क्या बकवास कर रहे हो? तुम सबके सामने मेरी मालकिन को बुरा-भला कह रहे हो।” फिर वह आने-जाने वालों पर चिल्लाने लगा, “उसे पकड़ो, उसे मारो! वह मेरी मालकिन को बदनाम कर रहा है!

और फिर, हर जगह से लोग आने लगे, और अफ़रा-तफ़री मच गई। कुछ लोगों के हाथ में डंडे थे, कुछ के हाथ में पत्थर; शोर चारों ओर गूंज रहा था। “उसे मारो, उसे मारो!” लैला, जो अपनी खिड़की में खड़ी थी, जब यह नज़ारा देखा और तुरंत वहां से भागकर आई कोई कैस पर डंडा उठा रहा था। कोई पत्थर फेंक रहा था, और लैला चिल्लाते हुए कैस की ओर दौड़ पड़ी चिल्ला रही थी, “रुको, उसे मत मारो! रुको, उसे मत मारो!”

आखिरकार, लैला कैस के पास पहुंच गई और एक परछाई की तरह बन गई, कैस के ऊपर लेट गई और चिल्लाई, “मुझे अभी मारो! मुझे अभी मारो!” सबके हाथ रुक गए। हर आँख हैरान थी, सोच रही थी कि क्या हुआ है। सब पर सन्नाटा छा गया। फिर लैला कैस से आज़ाद हुई और चिल्लाई, “अरे, बेवकूफों, यह पागल है! यह पागल है! आँखें होते हुए भी तुम अंधे हो। तुम उसे क्यों मार रहे हो? उसने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है?” सबने शर्म से सिर झुका लिया, और लैला रोते-रोते कैस की नज़रों से ओझल हो गई।

लोग चले गए, लेकिन कैस वहीं पड़ा रहा, ज़ख्मों से लथपथ। जब लैला के पिता को यह पता चला, तो वह बहुत गुस्सा हुए और गुस्से में अपने नौकरों से कहा, “कैस नाम के इस आदमी ने बचपन से हमारी बेटी को बदनाम किया है। इसे उठाकर कहीं दूर सड़क पर फेंक दो।” नौकर तुरंत हरकत में आ गए। वे घर से बाहर आए और बेहोश कैस के पास पहुँचे। एक ने उसे पकड़ा, और कंधे पर रखा, ऊँट से बाँधा और सेरा की ओर चल दिया। इस बीच, लैला के पिता ने उसके मंगेतर, जो एक बिज़नेसमैन था, को मैसेज भेजा कि बारात चाँद की एक तय तारीख को लाए।

जब ​​लैला की शादी हो रही थी, तो एक लड़के ने कैस को सेरा की रेत पर फेंक दिया था। कैस गर्म रेत पर आधा मरा हुआ पड़ा था। उसे फेंकने वाले लोग वापस आ गए थे। एक तरफ लैला के शादी की घंटियाँ (शहनाईया) बज रही थीं, तो दूसरी तरफ कैस गर्म रेत पर पड़ा था। जब कैश को होश आया, तो उसने अपनी आँखें खोलीं और चारों ओर देखा। हर जगह रेत ही रेत था। तब कैसे ने अपनी उंगली से उस गर्म रेत पर “लैला” शब्द लिखा। लेकिन हवा के एक झोंके ने उसे मिटा दिया। फिर कैश ने गर्म रेत से अपनी नज़रें हटाईं, आसमान की ओर देखा, और उसके मुँह से अनायास ही शब्द निकल गए: “लैला,” और फिर उसने रेत पर “लैला” शब्द लिख दिया। लेकिन वह “लैला” शब्द को रेत के बवंडर ने मिटा नहीं सका। वह ऐसे लिखा रहा जैसे कुदरत को कैश पर दया आ गई हो।

फिर कैश खड़ा हो गया। हवा तेज़ होती जा रही थी, और रेत की हवा आखिरकार तूफ़ान में बदल गई। हर जगह रेत के तूफ़ान घूम रहे थे, और कैश, एक अंधे आदमी की तरह, अपनी आँखों पर दोनों हाथ रखकर आगे बढ़ता रहा। और उसके होठों पर सिर्फ़ एक ही शब्द था। लैला लैला लैला रेत का तूफ़ान इतना तेज़ हो गया था कि उसके लिए चलना मुश्किल हो गया था। आखिर में, वह एक जगह गिर पड़ा, और तेज़ हवाएँ और रेत के तूफ़ान उसके ऊपर से गुज़रने लगी। लेकिन उसके मुँह से सिर्फ़ एक ही शब्द निकला: लैला लैला, लैला की शादीशुदा ज़िंदगी अच्छे से बीत रही थी, लेकिन अंदर से खोखली थी। लैला को हर रात, उसे रेगिस्तान में एक जवान आदमी का सपना आता था, जो एक पेड़ के नीचे बैठा था, उसकी आँखों में उसकी छवि दिखती थी। कई सालों बाद, एक दिन, एक पुराने दोस्त ने उसे बताया कि मजनू अभी भी ज़िंदा है।

वह हर दिन उसी पेड़ के नीचे तुम्हारा इंतज़ार करता है। लैला यह बात सुनकर काँप उठी। उसका दिल सीने में ज़ोर से धड़क उठा इतने सालों बाद भी, कोई उसका इंतज़ार कर रहा था। लैला भाग निकली। न रथ मे, न महलों से। वह नंगे पैर रेगिस्तान में भागी। और फिर, शाम को, वे एक बार फिर मिले। मजनू ने लैला की आँखों में देखा। उसके होठों से कोई शब्द नहीं निकला। बस एक आँसू बह निकला। लैला दौड़कर उसकी बाहों मे गिर गई। सालों बाद, दो दिल एक बार फिर लंबे समय के बाद गले मिले। किसी शब्द की ज़रूरत नहीं थी, बस साँसें बदल रही थी। लेकिन यह मिलन उनका आखिरी मिलन था।

मजनू का कमज़ोर शरीर अब और सह नहीं सकता था। उसी रात वह इस दुनिया से गुज़र (बिदा) हो गया। और रेगिस्तान रोशन होने से पहले लैला ने भी उसी के साथ आखिरी सांस ले ली। और इस दुनिया से बिदा हो गई ।उनकी बॉडी एक ही पेड़ के नीचे एक साथ मिलीं। लोगों ने उन्हें पेड़ के नीचे अगल-बगल दफ़ना दिया। वह पेड़ अब एक पवित्र जगह है। जो कि लोग आज भी वहाँ आते हैं और फुसफुसाते हैं, “प्यार यहाँ मरा नहीं। प्यार बदल गया

 

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