प्यार की कोई परिभाषा नहीं है और न ही इसे शब्दों में बयां किया जा सकता है। दुनिया में प्यार ही एक ऐसी चीज़ है जिसकी कोई कीमत नहीं है और जिसे कभी पैसे से नहीं खरीदा जा सकता। यह एक ऐसा खूबसूरत एहसास है जो दो लोगों को गहराई से जोड़ता है। यह
एक ऐसा बंधन है जो दो लोगों को प्यार की गहराई से बांधता है। जब प्यार साथ होता है, तो दुनिया स्वर्ग जैसी लगने लगती है। सच्चा प्यार हमेशा उन्हीं को मिलता है जो दिल से प्यार करते हैं। कोई भी किसी से आसानी से प्यार कर सकता है लेकिन यह आसानी से खत्म नहीं हो सकता।
हीर और रांझा पंजाब की एक मशहूर लव स्टोरी है। यह इतिहास की सबसे मशहूर लव स्टोरी में से एक है। हीर का असली नाम (इज्जत बीबी) , जो एक खूबसूरत औरत थी जो सियाल कबीले के एक अमीर परिवार में पैदा हुई थी। धीदो रांझा, जो रांझा कबीले से है, चार भाइयों में सबसे
छोटा था और पंजाब में चिनाब नदी के किनारे तख्त हजारा गांव में रहता था । राँझा का असली नाम भीदो था और राँझा उसका उप नाम था इसलिए सभी लोग उसे राँझा के नाम से पुकारते थे और कुछ लोग उसे मिया उमर भी कहकर पुकारते थे जो अपने पिता का सबसे प्यारा बेटा था।

जब उसके पिता, मौजू चौधरी की मौत हुई, तब रांझा सिर्फ़ 12 साल का था। रांझा का ज़मीन को लेकर अपने भाइयों से झगड़ा हो गया और उसने घर छोड़ दिया क्योंकि उसके भाइयों की पत्नियों ने उसे खाना देने से मना कर दिया था। अपने भाइयों से अलग होने के बाद, वह पेड़ों के
नीचे बैठकर बांसुरी बजाता था। एक बार, एक संत ने उससे पूछा, “तुमइतने उदास क्यों हो?” फिर रांझा ने संत को अपने बनाए हुए लव सॉन्ग गाए, जिसमें उसके सपनों की राजकुमारी का ज़िक्र भी था। पीर ने उससे कहा कि उसके सपनों की राजकुमारी कोई और नहीं बल्कि हीर हो सकती है। यह सुनकर रांझा अपनी हीर को ढूंढने निकल पड़ा।

हीर का जन्म पाकिस्तान के पंजाब में अमीर जाट परिवार में हुयी थी। हीर बहुत मज़बूत इरादों वाली लड़की थी। एक रात, रांझा चुपके से हीर की नाव में सो गया। हीर बहुत गुस्से में थी। लेकिन जैसे ही उसने रांझा को देखा, वह
अपना गुस्सा भूल गई और उसे देखती रही। फिर रांझा ने उसे अपने सपनों के बारे में बताया। रांझा पर फ़िदा होकर हीर उसे अपने घर ले गई और काम पर रख लिया। एक ही घर में काम करते और रहते हुए, वे कई सालों तक चुपके से मिलते रहे।

जब तक वे हीर के जलने वाले चाचा, कैदो, और उसके माता-पिता, चूचक और मलकी द्वारा पकड़े नहीं गए। हीर की शादी उसके परिवार और वहाँ के “मौलवी” ने सैदा खेड़ा नाम के दूसरे गाँव के एक आदमी से कर दी।

रांझा का दिल टूट गया। वह फकीर का भेष बनाकर गाँव-गाँव घूमने लगा। जब वह हीर के गाँव पहुँचा, तो हीर ने उसकी आवाज़ सुनी और उसे भीख देने के लिए बाहर आई। दोनों एक-दूसरे को घूरते (देखते) रहे। रांझा हर दिन फकीर बनकर आता था और हीर उसे भीख देती थी । वे रोज़ मिलने लगे। हीर की भाभी ने यह देख लिया। उसने
हीर को डांटाऔर रांझा गाँव छोड़कर चला गया। सब उसे फकीर मानकर पूजने लगे। उसकी गैरमौजूदगी में हीर बीमार पड़ गई। जब डॉक्टर (बैद) उसका इलाज नहीं कर पाए, तो हीर के पिता रांझा के पास गए और उससे मदद मांगी। रांझा हीर के घर लौट आया। उसने हीर के सिर पर
हाथ रखा और हीर कोहोश आ गया। जब लोगों को पता चला कि रांझा ही फकीर है, तो उन्होंने उसे पीटा और गाँव से निकाल दिया। फिर राजा ने उसे चोर समझकर गिरफ्तार कर लिया। जब रांझा ने राजा को सच बताया, तो उसने हीर के पिता को हीर कीशादी रांझा से करने का हुक्म दिया।
राजा के हुक्म से डरकर उसके पिता ने अपनी मंज़ूरी दे दी,
लेकिन यह मंज़ूरी सिर्फ़ एक दिखावा था। शादी के दिन, कैदो ने लड़की को उसके बर्ताव की सज़ा देने के लिए उसकेखाने में ज़हर मिला दिया, जिससे शादी नहीं हो सके।
यह सुनकर रांझा हीर की मदद के लिए दौड़ता है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है, क्योंकि वह पहले ही ज़हर खा चुकी होती है और मर जाती है। रांझा भी बचा हुआ ज़हरीला खाना खा लेता है और उसके पास ही मर जाता है।
हीर रांझा की कब्र :-
हीर रांझा को उनके गांव झिंग में दफनाया गया कहते हैं कि दुनिया मरते दम तक प्यार की दुश्मन होती है और दो दिलों को कभी मिलने नहीं देती है ,आज भी उनके प्यार के यादगार की कब्र बनी हुई है। भले ही वे मर चुके हैं, आज भी
हीर रांझा और उनके प्यार की महानता को याद किया जाता है। हर सच्चा प्यार करने वाला हीर रांझा के नाम की कसम खाता है। कहा जाता है कि इस दुनिया में हमें हीर रांझा, लैला मजनू, रोमियो जूलियट जैसे सच्चे प्यार करने वालों की कहानियां देखने को मिलती हैं। तो, यह थी हीर रांझा की सच्ची प्रेम कहानी।