Nohkalikai haunted history,नोहकलिकाई जलप्रपात Nohkalikai Falls का भूतिया इतिहास,

1.नोहकालिका फॉल्स के बारे में:-

आज, यह झरना न सिर्फ पर्यटक आकर्षण है, बल्कि लव एंड डार की एक दिल को छूने वाली कहानी का उदाहरण भी है। नोहकालिका झरने के पास एक परिवार रहता था,

और उनकी एक बेटी भी थी। एक दिन, लड़की अचानक घर से गायब हो जाती है। जब उसे खोजा गया, तो वह नोहकालिका झरने पर मर गयी। इस घटना के बाद
लोग वहां अकेले जाने से डरने लगे। यहाँ का पानी हरा-नीला होता है और फ़ेस्टिवल में फ़ासी से बहता है, जिससे यह हर सीज़न में एक अजूबा बन जाता है। अगर आप अगली बार मेघालय जाएं, तो इस झरने को जरूर देखें।

2. नोहाकालिकाई जलप्रपात का भूतिया इतिहास,:-

लेकिन, रहस्यमयी नोहकालिका फॉल्स के नाम के पीछे एक दिल दहला देने वाली कहानी है। नोह का लिकाई का मतलब “नोह का लिकाई” है। “का” शब्द का प्रयोग महिलाओं के सम्मान में किया जाता है। कहा

यह एक समय की बात है

नोहकालिकाई का भूतिया इतिहास
नोहकालिकाई के झरने का गिरता हुआ पानी

त है, झरने के पीछे के जंगल में एक गाँव था जहाँ लिकाई नाम की एक महिला रहती थी। लिकाई की एक छोटी बेटी थी। उनकी पहली पत्नी की मौत के बाद उन्होंने दूसरी शादी कर ली। पैसे के लिए, उसे अपने बच्चे को पीछे छोड़ कुली का काम करना था। जब भी वह काम से लौटता, तो अपना खाली समय

बच्चे के साथ बिताती थी उसे ऐसा देखकर उसकी दूसरी पत्नी नाराज हो गई थी कि बच्चे की वजह से वह जरा भी ध्यान नहीं रख पा रही है।
एक दिन, अरोमा में, लिकाई की गैरमौजूदगी में, दूसरा उसका

पति ने अपनी सौतेली बेटी को मार डाला बल्कि उसका मांस भी पकाकर खा लिया। जब काम करके थकी हुई घर लौटी, तो उसने बिना देखे ही खाना खा लिया। फिर, बच्ची को याद करके उसने उसे याद किया। जब वह सोपारी

खिलौने में अपने बच्चे की कटी हुई उंगलियां देखीं तो उसे सब समझ आ गया। दुःखी आत्मा और ब्रह्माण्ड से जल निकला, और वह दौड़कर इसी झरने के ऊपर से कूद गया। मुझे बताएं कि क्या लिकाई की आत्मा अभी भी उस शांत झील में तड़प रही होगी? मेरा मन फिर से एसोसिएट हो जाता है, और मेरे कदम अपने झरने के दूसरी तरफ बढ़ जाते हैं।

नोहकालिकाई का भूतिया इतिहास
नोहकालिकाई में पत्थर के ऊपर झरने का पानी

3. भूतिया सिद्धांत और डरावने अनुभव:-

स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय झरने के पास महिलाओं की चीख-पुकार और चीख-पुकार की आवाजें दिखाई देती हैं,
बीच-बीच में धुंध के बीच एक परछाईं झील के पास मुड़ती हुई दिखाई देती है।

सूरज के बाद यहां अजीब अजीब और डर लगता है

4. भौगोलिक क्षेत्र-भौगोलिक क्षेत्र:-

  • राज्य: मेघला
  • या मेघालय
  • ज़िला: ईस्टर्न मार्केट हिल्स
  • बारिश: लगभग 340 मीटर
  • भू-प्रकृति: खड़ी चट्टानें, गहरी घाटियाँ,
  • कृषि: वनस्पतिशास्त्र, वर्षा प्रधान
बनी झील के नीचे बहुत गहरी मंकी पाई जाती है। कहा जाता है कि
आज तक इसकी वास्तविक गहराई का अनुमान नहीं लगाया जा सका है।

5.जनसंख्या अनुपात

जनसंख्या अनुपात:-

  • नोहकालिकाई जलप्रपात के आसपास मुख्यत छोटे-छोटे गांव में बसे हुए लोग हैं।
  • कुल स्थानीय जनसंख्या :- लगभग 8,000-12,000
  • ग्रामीण जनसंख्या: लगभग 90%
  • शहरी जनसंख्या: लगभग 10%

6.धर्म अनुपात धर्म अनुपात-:

  • ट्राइब: वसीयत
  • ईसाई – लगभग 80%
  • पारंपरिक जनजातीय आस्था – 15%
  • अन्य – 5%

बिरादरी समाज मातृसत्तात्मक है, यानी संपत्ति और वंश महिला की ओर से घूमती है। यह व्यवस्था भारत में बहुत दुर्लभ है।

7. शिक्षा स्तर शिक्षा अनुपात :-

  • मेघालय का यह क्षेत्र शिक्षा के मामले में औसत से बेहतर माना जाता है। देशी दर: लगभग 75-80%
  • पुरुष बाज़ार: ~78%
  • महिला तेलुगु: ~72%

हालाँकि उच्च शिक्षा के लिए युवाओं को शिलांग या अटलांटा भेजा जाता है। ग्रामीण क्षेत्र में स्कूल तो हैं,
लेकिन गरीबों की कमी है।

8.जीवनशैली जीवनशैली:-

यहां के लोगों की सभ्यता सरल, प्रकृति-आधारित और मनोविज्ञान है।

  • मुख्य समुदाय: कृषि, पर्यटन, हस्तलिपि
  • भोजन: चावल, मांस, बांस की सब्जी
  • घर: लकड़ी और बांस से बने घर

रात में लोग जल्दी सो जाते हैं। अंधेरा होने से असामान्य रूप से शांति और दृश्य होता है।

9.अपराध अनुपात (अपराध अनुपात):-

  • हिंसक अपराध: लगभग नहीं के बराबर 
  • चोरी/ठगी: कभी-कभी पर्यटन सीजन में
  • महिला अपराध: बेहद कम

10.फर्जी गाइडनर :-

अधिक वसूलने वाले पैसे वाले की टैक्सी चालक की कहानियाँ सुनाकर लोगो से पैसा ठगते हैं।

11.पर्यटन और भूतिया आकर्षण:-

दिन में यह स्थान स्वर्ग जैसा लगता है, लेकिन शाम के बाद कोहरा गहराता सादाझील का काला पानी इसे एक भयानक पर्यटन स्थल बनाता है।

12. यात्रा के दौरान सावधानियाँ:-

1. सूर्य के बाद न भीगे
2. झील के पास न उतरें
3. अकेले फोटो लेने से पहले

13. निष्कर्ष:-

नोहकालिकाई जलप्रपात केवल एक पर्यटन स्थल नहीं है, बल्कि यह दुख, भय, लोककथा और प्रकृति का संगम है। एक अनपेक्षित डर, एक अधूरी चीख और एक कभी न भूलने वाला अनुभव साथ ले जाता है।

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